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आज के भारत में सबसे बड़ा अपराध क्या है?

आज के भारत में अगर आप शिक्षक हैं, छात्र हैं, और ऊपर से सवाल पूछने की जुर्रत कर बैठें, तो फिर तैयार रहिए लाठी खाने, गिरफ़्तार होने और गद्दार कहे जाने के लिए। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि हमारे तथाकथित 'न्यू इंडिया' की कड़वी सच्चाई है, जहाँ सोचने और बोलने वालों को संदिग्ध निगाहों से देखा जाता है।

हम विश्वगुरु हैं - क्या है इसकी सच्चाई ?

इन दिनों भारत में एक विचार बड़े जोर-शोर से फैलाया जा रहा है, हम विश्वगुरु हैं। यह नारा खास तौर पर उन समूहों से आता है जो अपने धर्म और संस्कृति को सर्वोच्च मानते हैं और भारत के अतीत को स्वर्णिम युग के रूप में प्रस्तुत करते हैं। इस सोच में एक भावनात्मक गर्व है, जो भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों को वर्तमान के राजनीतिक या सांस्कृतिक विमर्श में जोड़ता है। लेकिन इस दावे की तह में जाने से पहले यह जरूरी है कि हम तथ्यों और इतिहास की कसौटी पर इसे कसें।

समय की उत्पत्ति और सृजन की अवधारणा

जब कोई मुझसे यह प्रश्न करता है कि “क्या सृष्टि को भगवान ने बनाया?”, तो मैं सबसे पहले यह स्पष्ट करता हूं कि यह प्रश्न तभी तर्कसंगत है जब हम मानें कि सृष्टि की रचना किसी समय पर हुई। यानी जब पहले कुछ नहीं था, और फिर भगवान ने उसे बनाया। लेकिन आधुनिक भौतिकी, विशेषकर आइंस्टीन की सामान्य सापेक्षता की सिद्धांत (General Theory of Relativity), और स्टीफन हॉकिंग की The Grand Design जैसी कृतियों में यह दिखाया गया है कि समय और अंतरिक्ष (space-time) ब्रह्मांड की ही भौतिक विशेषताएं हैं; वे कोई बाहरी मंच नहीं हैं जिसमें ब्रह्मांड घटित होता है। 

E pur si muove

 *"E pur si muove..."* *"और फिर भी यह घूमती है…"*

Religion And Science

 आइंस्टीन का एक बहुत प्रसिद्ध कोटेशन है — 

विचार की गति, प्रकाश की गति से ज्यादा नहीं होती

कई लोग सोचते हैं कि हमारे दिमाग में जो विचार आते हैं, उनकी गति, यानी थॉट की स्पीड प्रकाश (लाइट) की स्पीड से भी ज्यादा होती है। जैसे, जब हम सूरज की कल्पना करते हैं, तो वह पल भर में हमारे दिमाग में आ जाती है। जबकि सच तो यह है कि सूरज की रोशनी को धरती तक आने में लगभग 8 मिनट लगते हैं। इससे ऐसा लगता है कि हमारा दिमाग लाइट से भी तेज काम करता है।

Life of pi (π)

पाई (Pi) आखिर है क्या? इसका सही जवाब किसी के पास नहीं। हम बस इतना जानते हैं कि चाहे कोई वृत्त (Circle) कितना ही बड़ा हो या कितना ही छोटा, जब भी उसकी परिधि (Circumference) को उसके व्यास (Diameter) से भाग देंगे, तो हर बार वही अद्भुत मान सामने आता है — पाई (Pi)। यह नियम इस पूरे ब्रह्मांड (Universe) में हर जगह एक जैसा है।

विज्ञान, तर्क और मूर्खताओं की कीमत

 *📝 विज्ञान, तर्क और मूर्खताओं की कीमत : एक इतिहास, जो अब भी दोहराया जा रहा है*

धर्म के प्रतीक : अर्थ से अनभिज्ञता तक

हम नहीं जानते कि शिवलिंग का क्या वास्तविक अर्थ है। हम यह भी नहीं जानते कि मंदिरों में बजने वाले घंटों का क्या महत्व है, गर्भगृह की बनावट ऐसी क्यों होती है, देवताओं के चार या आठ हाथ आखिर क्यों दिखाए जाते हैं और उनके हाथों में जो शस्त्र, कमल, ग्रंथ या अन्य वस्तुएँ हैं, उनका क्या प्रतीकात्मक संदेश है। हमें यह भी स्पष्ट नहीं कि ब्रह्मा के चार सिर किस ज्ञान की ओर संकेत करते हैं या ब्रह्मा और ब्रह्म में कौन सा सूक्ष्म किंतु गहरा अंतर है।

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