भारतीय दर्शन में वेदांत
भारतीय दर्शन में वेदांत: वेदों से उपनिषदों तक का दार्शनिक विकासक्रम एवं विविध शाखाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन 1. वेदांत क्या है? भारतीय दार्शनिक और आध्यात्मिक परंपरा में 'वेदांत' केवल एक शब्द, संप्रदाय या ग्रंथ मात्र नहीं है, बल्कि यह सदियों तक चलने वाली उस गहन वैचारिक एवं आध्यात्मिक यात्रा का चरम बिंदु है जिसने मानव चेतना को भौतिक कर्मकांडों की संकीर्णता से उठाकर विशुद्ध आत्म-साक्षात्कार के अनंत आकाश तक पहुँचाया। यह भारतीय चिंतन का वह शिखर है जहाँ ज्ञान अपनी पूर्णता को प्राप्त करता है। "वेदांत" शब्द की व्युत्पत्ति एवं वास्तविक अर्थ संस्कृत भाषा की व्युत्पत्ति के अनुसार, 'वेदांत' दो शब्दों की पारिभाषिक संधि से निर्मित है: 'वेद' और 'अंत'। भारतीय साहित्य में "वेद" का अर्थ 'विशुद्ध ज्ञान' या उन प्राचीन भारतीय श्रुति ग्रंथों का विशाल संग्रह है जिन्हें अपौरुषेय माना गया है। वहीं, "अंत" शब्द का सामान्य लौकिक अर्थ 'समाप्ति' या 'अंतिम भाग' होता है। इस प्रकार पूर्ण शाब्दिक अर्थ में वेदांत का तात्पर्य "वे...