जीवन का उद्देश्य
आखिर “जीवन का उद्देश्य” इतना कठिन प्रश्न क्यों है? कल्पना कीजिए कि एक मछली समुद्र के भीतर तैर रही है और अचानक उससे पूछा जाए—“समुद्र क्या है?” वह चारों ओर देखेगी। उसे पानी दिखाई नहीं देगा, क्योंकि वह उसी के भीतर पैदा हुई है, उसी में जी रही है। समुद्र उसके लिए इतना सामान्य है कि वह उसे देख ही नहीं सकती। शायद मनुष्य की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। हम ब्रह्मांड के भीतर हैं और पूछ रहे हैं—“हम यहाँ क्यों हैं?” लेकिन जिस वास्तविकता के भीतर हम मौजूद हैं, उसी के बारे में हम अंतिम उत्तर खोज रहे हैं। यही इस प्रश्न की पहली और सबसे बड़ी कठिनाई है। --- हर प्रश्न का उत्तर नहीं होता, कुछ प्रश्न उत्तरों को जन्म देते हैं जब हम पूछते हैं— पृथ्वी सूर्य के चारों ओर क्यों घूमती है? बारिश क्यों होती है? शरीर बूढ़ा क्यों होता है? तो विज्ञान उत्तर दे सकता है। लेकिन जब हम पूछते हैं— “मैं क्यों हूँ?” तो प्रश्न का स्वरूप बदल जाता है। यह "कैसे" का प्रश्न नहीं है, यह "क्यों" का प्रश्न है। विज्ञान बता सकता है कि जीवन कैसे उत्पन्न हुआ होगा। लेकिन "जीवन का उद्देश्य क्या है?" यह विज्ञान की प्...